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Rajasthan Unlock 3.0 guidelines: राज्य सरकार का अहम फैसला, इन शर्तों के साथ धार्मिक स्थल, जिम सहित दुकानों पर पाबंदी हटी

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Rajasthan Unlock 3.0 guidelines: अनलॉक-3 सम्बन्धी केंद्र सरकार की जारी गाइडलाइन्स के बाद शुक्रवार को राजस्थान सरकार ने भी अनलॉक-3 के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं. राजस्थान सरकार ने इस बाबत कई बड़े फैसले किये है. राज्य सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन्स में कंटेनमेंट जोन और कर्फ्यू लगे इलाकों में सख्ती बरक़रार रखी गई है. इन इलाकों में किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई है. हालांकि कंटेनमेंट जोन के इतर इलाकों में राजस्थान सरकार ने सशर्त कई बड़ी छुट दी है.

गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह की ओर से अनलॉक-3 के लिए जारी गाइडलाइन्स (Rajasthan Unlock 3.0 guidelines) के मुताबिक, सूबे में 1 सितम्बर से धार्मिक स्थल खुल सकेंगे. अनलॉक-3 के क्रम में कंटेनमेंट जोन के बाहर बफर जोन की पहचान और ऐसे क्षेत्र में गतिविधियों पर पाबंदियों की जिम्मेदारी जिला स्तर के पदाधिकरियों को दी गई है.

किन चीजों पर से हटी पाबंदी?

– ग्रामीण इलाकों में छोटे पूजा स्थल यानी मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों को सशर्त खोलने की अनुमति मिली है. हालाँकि इसके लिए गृह विभाग अलग से विस्तृत गाइडलाइन्स मुहैया कराएगा.
– दुकानों में एक समय में 2 से अधिक (छोटी दुकानों में) या 5 से अधिक (बड़ी दुकानों में) ग्राहकों की उपस्थिति पर पाबंदी रहेंगी. इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनने सहित तमाम SOP का पालन सुनिश्चित करना होगा.
– स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए जिला, उपखंड, नगरीय निकाय और पंचायत स्तर पर आयोजनों को अनुमति. इसके लिए भी जारी गाइडलाइन्स की पालना जरूरी.
– 5 अगस्त से योग संस्थान और जिम खुल सकेंगे. इसके लिए भारत सरकार की ओर से जो एसओपी जारी की जाएगी, वही राज्य में भी लागु रहेगी.
– विवाह समारोह को उपखंड मजिस्ट्रेट की पूर्व सूचना, सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने और अधिकतम मेहमानों की संख्या 50 से अधिक नहीं रखने की शर्त पर मंजूरी.
– अंतिम संस्कार संबंधि कार्यक्रमों में 20 से अधिक लोगों के शामिल होने की अनुमति नहीं रहेगी.

इन चीजो पर जारी रहेगी पाबंदी:
– केंद्र सरकार के गृहमंत्रालय की ओर से अनुमति के अतिरिक्त अन्तरराट्रीय हवाई यात्राएं बंद रहेंगी.
– मैट्रो, रेल सेवाएं स्थगित रहेंगी.
– सभी स्कूल-कॉलेज, कोचिंग सेंटर सहित शैक्षणिक संस्थान 31 अगस्त तक के लिए बंद रहेंगे.
– सभी सीनेमा हॉल, स्वीमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थियेटर, बार (पहले से अनुमति प्राप्त होटल, रेस्टोरेंट और क्लब को छोड़कर), ऑडिटोरियम, एसेंबली हॉल और ऐसे ही अन्य स्थान पूरी तरह से बंद रखे जाएंगे.
– सभी सामाजिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन, आकदमिक, सांस्कृतक, धार्मिक और अन्य सभाएं और बड़े सामूहिक आयोजनों पर भी पाबंदी पूर्व की तरह जारी रहेगी.

राज्य सरकार की ओर से प्रदेश भर के लिए अनलॉक-3(Rajasthan Unlock 3.0 guidelines) सम्बन्धी गाइडलाइन्स जारी करने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोरोना से प्रदेशवासियों की जीवन रक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है. जुलाई माह में मृत्यु दर एक प्रतिशत से भी कम रही है. हमारा पूरा प्रयास है कि रिकवरी दर लगातार बढे़ और मृत्यु दर निचले स्तर तक लाएं. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में आईसीएमआर की अनुमति के साथ जल्द से जल्द प्लाज्मा थैरेपी शुरू करने के निर्देश दिए हैं. बता दें कि जयपुर, जोधपुर, कोटा एवं उदयपुर जैस शहरों में पहले से ही प्लाज्मा थैरेपी की शुरुआत हो गई है.

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राजनीति

राजस्थान: SOG ने हॉर्स ट्रेडिंग मामले में राजद्रोह की धारा हटाई, केस ACB को ट्रान्सफर हुआ

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राजस्थान: सूबे में सियासी उठापटक का आज 26वां दिन है. सचिन पायलट सहित उनके कैंप के बागी विधायकों के पार्टी में वापसी के सुगबुगाहट के बीच विधायकों के हॉर्स ट्रेडिंग से जुड़े मामले में एक बड़ी खबर सामने आई है. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग यानी खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को ट्रांसफर कर दिया है. साथ ही राजद्रोह की धारा भी हटा ली गई है.

मालूम हो कि सचिन पायलट सहित उनके कैंप के बागी विधायकों को राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने राजद्रोह की धारा के तहत ही नोटिस दिया था. जिस पर सचिन पायलट सहित उनके कैंप के विधायकों ने करा एतराज जताते हुए अपने स्वाभिमान से भी जोड़ा था. पायलट खेमे को जो नोटिस भेजा गया था, उसमें आईपीसी की धारा 124ए और 120बी का जिक्र था. इसमें से धारा 124ए से देशद्रोह से जुड़ी है.

रिपोर्ट्स की माने तो कोई भी नागरिक सरकार विरोधी बात लिखता या बोलता है या फिर उसका समर्थन करता है या राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो उस पर इस धारा के तहत केस दर्ज होता है. इस मामले में दोषी पाए जाने पर 3 साल की सजा से लेकर उम्र कैद तक हो सकती है.

इस सब के बीच सचिन पायलट सहित उनके कैंप के बागी विधायकों के पार्टी में वापसी की सुगबुगाहट ने एक बार फिर से रफ़्तार पकड़ लिया है. बागी विधयाकों को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह खबर सामने आई कि वे पार्टी से बाहर नहीं जाना चाहते, लेकिन राजस्थान में मुख्यमंत्री का चेहरा बदलना चाहिए. बताया गया कि उन्होंने आलाकमान से मांग की है कि अगर सीएम के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति पर विचार किया जाता है, तो वे सभी पार्टी के साथ हैं. हालाँकि पार्टी के भीतर किसी ने भी इसकी पुष्टि नहीं की.

बाद में सोमवार दोपहर को जैसलमेर कांग्रेस की ओर से जैसलमेर में प्रेस कांफ्रेंस को संबोंधित करने आये रणदीप सुरजेवाला ने इस सवाल के जवाब में कि क्या बागी विधायकों ने पार्टी में वापसी के लिये कोई शर्त रखी है, कहा कि सबसे पहले बागी विधायक वार्तालाप करें और उसको करने के लिए पहली शर्त है कि भाजपा की मेजबानी छोड़ें. मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली हरियाणा की भाजपा सरकार का सुरक्षा चक्र छोड़ें.

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बागी विधायकों के वापसी शर्त पर बोली कांग्रेस- पहले BJP से दोस्ती तोड़ घर लौटें

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कल तक गहलोत सरकार पर मंडराते संकट को लेकर चर्चा में बने राजस्थान में अब सवाल इस बात पर आकर टिक गई है कि आख़िरकर सचिन पायलट सहित उनके कैंप के बागी विधायकों का अगला स्टैंड क्या होगा. गहलोत कैंप के विधायकों के जैसलमेर शिफ्टिंग के बाद बागी कांग्रेस विधायकों के पार्टी में वापसी के सुगबुगाहट तेज हो गए है. इस सब के बीच कांग्रेस ने साफ़ कर दिया है कि जब तक राजस्थान के बागी कांग्रेस विधायक हरियाणा के मानेसर स्थित रिसोर्ट से वापस राजस्थान नहीं आ जाते है. पार्टी कोई सुनवाई नहीं करेगी.

मंगलवार को जैसलमेर में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि राजस्थान के बागी कांग्रेस विधायकों को वापसी के लिए बातचीत से पहले भाजपा से दोस्ती तोड़नी होगी तथा उसकी मेजबानी छोड़कर घर लौटना होगा.

राजस्थान कांग्रेस की स्टेट लीडरशिप और खासकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok gehlot) के नेतृत्व से नाराज होकर पार्टी से बगावत करने वाले सचिन पायलट (Sachin Pilot) सहित 19 कांग्रेस विधायकों की पार्टी में वापसी की संभावना के सवाल पर सुरजेवाला ने कहा,”सबसे पहले बागी विधायक वार्तालाप करें और उसको करने के लिए पहली शर्त है कि भाजपा की मेजबानी छोड़ें. मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली हरियाणा की भाजपा सरकार का सुरक्षा चक्र छोड़ें.”

इस दौरान सुरजेवाला ने हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर नित गठबंधन सरकार पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा,”हरियाणा में आए दिन बच्चों की हत्याएं हो रही है, सामूहिक दुष्कर्म हो रहे हैं, गुड़गांव में लोगों को सरेराह पीटा जा रहा है और इसके लिए पुलिस उपलब्ध नहीं लेकिन इन 19 विधायकों की सुरक्षा के लिए एक हजार के करीब पुलिस कर्मी लगाए गए हैं. कांग्रेस के नाराज विधायकों को भाजपा जो सुरक्षा दे रही है उसके क्या मायने हैं. ”

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरजेवाला ने आगे कहा,” …इसलिए बागी विधायक पहले भाजपा की आवभगत छोड़ें ..पहले भाजपा से मित्रता तोड़ें, पहले भाजपा का साथ छोड़ें, उसकी मेहमाननवाजी छोड़ें, पहले भाजपा का सुरक्षा चक्र तोड़े अपने घर वापसी करें तब वार्तालाप होगा.”

उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत सरकार को समर्थक देने वाले तमाम कांग्रेस व निर्दलीय विधायक जैसलमेर के एक निजी होटल में रुके हुए हैं. जबकि सचिन पायलट सहित उनके कैंप के 19 बागी विधायकों के हरियाणा के मानेसर स्थिति एक रिसोर्ट में ठहरने की खबर है. इस सब के बीच अब 14 अगस्त से राज्य विधानसभा का सत्र भी आहूत होना है.

इसे भी पढ़ें: कब अयोग्य घोषित हो जाते है विधायक? इन 5 बिन्दुओं में आसानी से समझिये क्या है दल-बदल कानून

जैसलमेर में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने 5 अगस्त को होने वाले श्री राम जन्म भूमि मंदिर के भूमि पूजन को लेकर कहा कि राम का चरित्र सर्वांगीण है. राम सभी हैं. गांधी के रघुपति राजा राम सबको सम्मति देने वाले हैं. राम शक्ति की मौलिक कल्पना हैं. राम संकल्प हैं. सहयोगी हैं. सबके हैं. आगामी 5 अगस्त को रखा गया शिलान्यास सांस्कृतिक समागम का प्रतीक बनेगा.

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Rajasthan Politics: बागी विधायकों पर सॉफ्ट मूड में CM गहलोत, बोलें- हाईकमान ने माफ किया तो गले लगा लूंगा

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Rajasthan Politics: राजस्थान के सियासी घमासान में एक बार फिर से ट्विस्ट है। कल तक सचिन पायलट सहीत उनके खेमे के विधायकों को जमकर कोसने वाले मुख्यमंत्री अब बदल-बदले से नजर आ रहे है। बागी विधायकों के प्रति उनका रुख नरम हो गया है। शनिवार को मुख्यमंत्री गहलोत ने यहां तक कह दिया कि अगर आलाकमान सबको (बागी विधायक) माफ करता है तो मैं गले लगाने के लिए तैयार हूं।

शनिवार को जैसलमेर में मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान(Rajasthan Politics) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि, ‘मैं एग्रेसिव नहीं हूं। प्यार से मोहब्बत से बात करता हूं। हर पार्टी, हर मंत्री का आदर करता हूं। मुस्कुराता रहता हूं, ये भगवान की देन है। अगर आलाकमान सबको (बागी विधायक) माफ करता है तो मैं गले लगाने के लिए तैयार हूं। मुझे पार्टी ने बहुत कुछ दिया है। मुझे क्या चाहिए। जो कर रहा हूं जनता की सेवा के लिए कर रहा हूं। आलाकमान के फैसले पर मुझे कोई एतराज नहीं है।’

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को एक बार फिर भाजपा पर उनकी सरकार को गिराने का आरोप लगाया। सीएम गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार को गिराने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का बड़ा खेल खेल रही है।

अशोक गहलोत ने कहा कि ‘देश के हालात गंभीर है। राजस्थान की जनता ने हमारा साथ दिया। भाजपा कौन होती है सरकार गिराने वाली। हमने कभी उनकी सरकार गिराने की कोशिश नहीं की। दुर्भाग्य से भाजपा का हॉर्स ट्रेडिंग का खेल बहुत बड़ा है। खून उनके मुंह लग चुका है। कर्नाटक और मध्यप्रदेश के अंदर इसलिए यहां प्रयास कर रहे हैं। पूरा गृह मंत्रालय राजस्थान में सरकार गिराने के काम में लगा हुआ है।’

इस दौरान मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजस्थान में चल रहे इस ‘तमाशे’ को बंद करवाने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘मोदी जी प्रधानमंत्री हैं, जनता ने उनको दो बार मौका दिया है, उन्होंने थाली बजवाई, ताली बजवाई, मोमबत्ती जलवायी, लोगों ने उनकी बात पर विश्वास किया, ये बहुत बड़ी बात है। उस प्रधानमंत्री को चाहिए कि जो कुछ तमाशा हो रहा है राजस्थान में, वह उसको बंद करवाएं।’

मुख्यमंत्री गहलोत ने विधानसभा सत्र की तारीख तय होने के बाद विधायकों के ‘रेट’ बढ़ने की बात एक बार फिर दोहराते हुए कहा, ‘खरीद-फरोख्त की दर बढ़ गई है, जैसे ही विधानसभा सत्र की घोषणा हुई और कीमत बढ़ा दी उन्होंने, आप बताइए क्या तमाशा हो रहा है?’

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के ट्वीट को लेकर किये गए एक सवाल के जवाब में सीएम गहलोत ने कहा, ‘जो आदमी पकड़ा गया हो ऑडियो टेप में। हॉर्स ट्रेडिंग के षड़यंत्र में शामिल हो। उनके खिलाफ पहले से भी मुकदमे चल रहे हैं। उन गजेंद्र सिंह शेखावत को नैतिकता के आधार पर खुद इस्तीफा देना चाहिए।’

UP के बुलंदशहर में 25 जुलाई से लापता वकील की मिली लाश, प्रियंका बोलीं- UP में क्राइम-कोरोना कंट्रोल से बाहर

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में चल रहे सियासी लड़ाई में विधायकों को तोड़ने की आशंका के बीच गहलोत सरकार को समर्थन देने वाले तमाम विधायकों को शनिवार को 3 स्पेशल चार्टर विमान के जरिये जैसलमेर रवाना कर दिया गया। मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने कैम्प के विधायकों को ठहराने के लिए जयपुर से करीब 700 किलोमीटर दूर होटल सूर्यागढ़ को अपना नया ठिकाना बनाया है।

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Rajasthan Crisis : गहलोत सरकार ने राजधानी को छोड़ जैसलमेर को ही क्यों चुना ? जाने इनसाइड स्टोरी

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राजस्थान डेस्क: पिछले 20 दिनों से राजस्थान के सियासी घटनाक्रम (Rajasthan Crisis) पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं । राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और पूर्व पीसीसी चीफ और डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin pilot) के गुट के बीच सियासी वर्चस्व की लड़ाई लगातार जारी है। इस कहानी में हर दिन नया मोड़ आता है ,नया घटनाक्रम आता है और नए-नए ड्रामे सामने आते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में एक खेमा अशोक गहलोत का (Ashok Gehlot) है और दूसरा खेमा सचिन पायलट का है। पहले जुबानी जंग होती हैं, फिर बगावत होती है। उसके बाद अलग-अलग गुटों-ठिकानों में होटलों में बाड़ाबंदी होती हैं।स्पीकर नोटिस जारी करते हैं। आखिर में मामला हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है। सियासी घटनाक्रम लगातार घूमते-फिरते राजस्थान की जनता को चक्कर गिन्नी खिला रहा है। बीते 7 दिन में 1000 से ज्यादा करोना के मामले रोज आ रहे हैं। ऐसे में 20 रोज पहले से ही होटलों में कैद सरकार यानी गहलोत खेमे के सारे विधायक, मंत्री जयपुर के फेयर माउंट होटल को छोड़कर अब सुदूर पाकिस्तान बॉर्डर से सटे इलाके में जैसलमेर के सूर्य पैलेस होटल (Surya Hotal Place ) में जा ठहरें है।

ऐसे में सवाल खड़ा होता है,सरकार में होते हुए विधायकों और मंत्रियों को राजधानी में किस बात का डर सता रहा है। आखिरकार उनको ठिकाना क्यों ? बदलना पड़ रहा है। जब ठिकाना भी बदल रहे हैं,तो जयपुर में नहीं सुदूर बार्डर से सटे जैसलमेर का पांच सितारा होटल क्यो?

Read more:- Rajasthan: विधायकों के जैसलमेर शिफ्टिंग पर बोले गहलोत- हम लोकतंत्र बचाने में लगे

जानिए जयपुर छोड़ने और नया ठिकाना जैसलमेर बनाने के पीछे की वजह हैं।

  • बीते दिनों अशोक गहलोत के करीबी व्यापारी राजीव अरोड़ा और धर्मेंद्र राठौड़ सहित कईयों के 40 से ज्यादा ठिकानों पर इनकम टैक्स के छापे पड़ने। ऐसे में केंद्रीय एजेंसी जयपुर में ज्यादा सक्रिय हो रही थी। बताया जा रहा कि राज्य सरकार को फेयरमोंट होटल में बड़ी कार्रवाई होने का अंदेशा था।
  • पिछले कई दिनों से गहलोत कैंप की बाड़ाबंदी वाले एरिया में लोगों की आवाजाही बढ़ गई थी। साथ ही जयपुर में बड़ाबंदी की जगह पर धरने प्रदर्शन शुरू हो गए थे। ऐसे में सरकार ऐसी जगह चाहती थी जहां आवाजाही कम हो। क्योंकि ऐसे हालातों में विधायक और सरकार असहज महसूस कर रही थी।
  • विधायकों को 20 से ज्यादा दिन होटल में ठहरे हो गए थे।ऐसे में विधायकों के परिजनों और करीबियों का होटल में आने-जाने का सिलसिला ज्यादा बढ़ गया। गहलोत कैंप विधायकों के परिजनों को बिना नाराज किए,इन पर रोक चाहता था।इसलिए सुदूर जैसलमेर को सुरक्षित ठिकाने के तौर पर चुना गया।
  • हालांकि सूत्रों के हवाले से खबर हैं, की जयपुर से बड़ाबंदी को सवाई माधोपुर व अन्य जगह पर शिफ्ट करने के लिए भी विचार हुआ था। लेकिन सीमाई इलाका होने और बाहरी लोगों की पहुंच आसान नहीं होने के कारण जैसलमेर को सबसे सुरक्षित ठिकाने के तौर पर चुना गया।
  • मुख्यमंत्री गहलोत के करीबियों का कहना है, की जैसलमेर की तनोट माता में गहलोत की आस्था है और तनोट माता की कृपा से वह सरकार बचा लेंगे। खबर तो यहां तक है कि विधायकों को माता के दर्शन करवाने भी ले जाया जाएगा।
  • बीते दिनों रणदीप सुरजेवाला ने कहा था “अगले 48 घंटे में पायलट कैंप से तीन विधायक जयपुर आएंगे” पर कोई नहीं आया। वही इस पर पलटवार करते हुए पायलट कैंप के उम्रदराज विधायक हेमाराम चौधरी ने कहा था “एक बार गहलोत बड़ाबंदी खोल कर देखें, उनके 15 से 20 विधायक हमारे संपर्क में हैं और टूटकर यहां आ जाएंगे” ऐसे में जयपुर में पायलट लॉबी के लोग सक्रिय होने का अंदेशा था। इसलिए गहलोत इनसे बचने के लिए जैसलमेर को चुना। क्योंकि जैसलमेर के कांग्रेस संगठन में पायलट की उतनी लोकप्रियता और पकड़ नहीं है, जबकि गहलोत का खासा दबदबा है। इसीलिए इसे सबसे सुरक्षित स्थान के तौर पर चुना गया।
  • कर्नाटक,मध्य प्रदेश, गोवा,मणिपुर, अरुणाचल यह सब वो जगह है। जहां अमित शाह बीते दिनों भाजपा की सरकार जोड़-तोड़ करके बना चुके है। ऐसे में केंद्रीय जांच एजेंसियां सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स सुबे में सक्रिय होने और अमित शाह के हर जगह सरकार बना लेने के ट्रेंड के चलते अशोक गहलोत विधानसभा सत्र शुरू होने तक एक सुरक्षित ठिकाना चाहते थे।
  • खैर, पल-पल बदलते राजस्थान के सियासी घटनाक्रम का असली में निचोड़ आगामी 14 अगस्त को होने वाले विधानसभा सत्र में ही निकल पाएगा, ऐसी उम्मीद है।

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राजस्थान ब्रेकिंग: विधायकों के खरीद फरोख्त से जुड़ी ऑडियो FSL जांच में सही पाई गई

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राजस्थान में आज सियासी उठापटक का 23वां दिन है. विधानसभा सत्र तय होने और गहलोत कैंप के विधायकों के जैसलमेर शिफ्टिंग से मचे हलचल के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है. हफ्तों पहले विधायकों के खरीद-फरोख्त से जुड़े वायरल हुए ऑडियो के मामले राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को बड़ी सफलता हाथ लगी है. विधायकों के खरीद-फरोख्त से जुड़ी वायरल ऑडियो एफएसएल(FSL) जांच में सही पाई गई है.

दरअसल, वायरल हुए ऑडियो के प्रमाणिकता को लेकर विपक्षी पार्टियों और खुद कांग्रेस के बागी विधायकों ने सवाल उठाये थे. जिसके बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने ऑडियो टेप की एफएसएल(FSL) जांच करवाने का फैसला लिया था ताकि यह पता चल सके की इसमें कोई छेड़छाड़ हुई है या नहीं. जो अब जांच में सही पाई गई है. जांच में यह भी सामने आया है कि ऑडियो के साथ किसी तरह का छेड़छाड़ नहीं हुआ है.

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले विधायकों के खरीद-फरोख्त से जुड़े वायरल ऑडियो के बाद मरुधरा की सियासत में जारी हलचल भूचाल में बदल गया था. वायरल ऑडियो में सचिन पायलट कैंप के कांग्रेस के बागी विधायक भंवर लाल शर्मा, बीजेपी नेता संजय जैन व केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह के आवाज होने की बात सामने आई थी. जिसके बाद संजय जैन की गिरफ़्तारी भी हुई थी. और हरियाण के मानेसर में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की एक टीम कांग्रेस के बागी विधायक भंवर लाल शर्मा से पूछताछ करने गई थी. लेकिन शर्मा वहां नहीं मिले. लिहाजा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की टीम को खाली हाथ लौटना पड़े.

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की ओर से पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था. एसओजी ने केंद्रीय मंत्री से आवाज के नमूने के लिए भी अनुरोध किया था. लेकिन केंद्रीय मंत्री ने इसके प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए वॉइस सैंपल देने से इंकार कर दिया था.

फ़िलहाल ऑडियो के जांच में सही पाए जाने के बाद एसओजी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में अर्जी लगाई है कि अब आगे की जांच के लिए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह और कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा के आवाज के नमूने की जांच जरूरी है.

बतौर रिपोर्ट्स, एसओजी ने कहा है कि वायरल ऑडियो एफएसएल जांच के लिए 28 जुलाई को भेजा गया था जिसकी परीक्षण रिपोर्ट शुक्रवार को आ गई है. एसओजी ने कोर्ट से कहा है कि नोटिस देने के बावजूद राजेंद्र सिंह और भंवर लाल शर्मा वॉयस सैंपलिंग के लिए नहीं आ रहे हैं इसलिए कोर्ट आदेश दे कि आगे की जांच के लिए वे अपना वॉयस सैंपल एसओजी को दें. पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने इस पर 4 अगस्त को रिपोर्ट तलब की है.

CM गहलोत बोलें- हॉर्स ट्रेडिंग के ऑडियो पर शक तो हम अमेरिका की FSL से भी जांच को तैयार है

उल्लेखनीय है कि वायरल ऑडियो से जुड़े मुद्दे पर सीएम गहलोत शुरू से ही विपक्ष पर हमलवार रहे है. मुख्यमंत्री गहलोत ने बीतें हफ्ते विधायकों के खरीद फरोख्त (Horse Trading) से जुड़े वायरल ऑडियो को पूरी तरीके से सही बताते हुए यहाँ तक कह दिया कि अगर वायरल ऑडियो पर शक है तो हम इन ऑडियो की अमेरिका (America) की एफएसएल (FSL) से भी जांच करवाने को तैयार हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जयपुर और दिल्ली की जांच पर भरोसा नहीं है तो इन ऑडियो की अमेरिका से जांच करवा सकते हैं.

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Rajasthan: विधायकों के जैसलमेर शिफ्टिंग पर बोले गहलोत- हम लोकतंत्र बचाने में लगे

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Rajasthan: शुक्रवार का दिन भी राजस्थान की सियासत में उठापटक भरा रहा. सुबह से ही गहलोत कैंप में मचे हलचल के बाद दोपहर को आख़िरकर 95 समर्थक विधायकों को 3 स्पेशल चार्टर प्लेन के जरिये जैसलमेर भेजा गया. यहां उन्हें फाइव स्टार होटल सूर्यगढ़ में ठहराया गया है. विधायकों के साथ खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी जैसलमेर पहुंचे हैं. जैसलमेर जाने के क्रम में जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि हमारा काम गवर्नेंस देना है. लेकिन इस समय हमारे लिए सरकार बचाना भी जरूरी है.

सीएम गहलोत ने जयपुर एयरपोर्ट पर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा. मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा- अमित शाह जी आपको यह क्या हो गया है? हर वक्त सोचते हैं कि सरकार कैसे गिराऊं? उन्होंने कहा, अमित शाह का नाम इसलिए लेता हूं, क्योंकि फ्रंट पर वही आते हैं. चाहे गोवा हो या मणिपुर हो. इसलिए कहना पड़ता है अमित शाह जी आपको क्या हो गया है? आप रात-दिन जागते हुए हर वक्त सोचते हैं कि सरकार कैसे गिराऊं?

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा पूरे देश को राजस्थान(Rajasthan) का घटनाक्रम पता है. भाजपा नेता कैसा खेल खेल रहे हैं. हमारे साथियों को साजिश करके मानेसर में रखा गया है. माहौल ऐसा बन गया कि राजस्थान में क्या हो रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा, मंत्री आते-जाते रहेंगे. हम सरकार में लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार बचाना जरूरी है, क्योंकि केंद्र सरकार खुद लग गई है. इसके बावजूद हम सरकार चला रहे हैं.

कोरोना काल में सरकारी कामकाज को लेकर किये गए एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि हम गवर्नेंस पर किसी भी तरह से फर्क नहीं पड़ने दे रहे. उन्होंने कहा कि अपने मंत्रियों के साथ कल जयपुर आ जाएंगे. मैं और मेरे मंत्री जयपुर में ही रहेंगे. जैसलमेर में सिर्फ विधायक रहेंगे. सीएम ने कहा कि हमारा काम गवर्नेंस देना है. लेकिन इस समय हमारे लिए सरकार बचाना भी जरूरी है. हम लोग लोकतंत्र को बचाने में लगे हुए हैं. कांग्रेस है, जो लोकतंत्र को बचा रही है.

विधायकों के जैसलमेर शिफ्टिंग पर मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि विधायक एक ही जगह पर रहकर तनाव में आ गए थे, इसलिए उन्हें शिफ्ट करना पड़ा. इससे दबाव कम होगा. सभी विधायक पिछले 18 दिन यानी 13 जुलाई से जयपुर के फेयरमॉन्ट होटल में ठहरे थे.

CM गहलोत बोलें- हॉर्स ट्रेडिंग के ऑडियो पर शक तो हम अमेरिका की FSL से भी जांच को तैयार है

उल्लेखनीय है कि राजस्थान (Rajasthan) की अशोक गहलोत सरकार सचिन पायलट सहित अपने 19 विधायकों के बगावत का सामना कर रही है. पायलट कैंप के सभी विधायक हरियाणा के मानेसर स्थित रिसोर्ट में ठहरे हुए है. विधानसभा सत्र के तारीख की घोषणा हो चुकी है. ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने विधायकों को एकजुट करने में लगे है. बताया जा रहा है कि सत्र आहूत होने पर कांग्रेस सदन में कॉन्फिडेंस मोशन ला सकती है. जिससे अगले 6 महीने के लिए सरकार पर मंडरा रहा खतरा ख़त्म हो जाये.

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Sushant Singh Case: दिशा सलियन से लेकर रिया चक्रवर्ती तक, मुंबई पुलिस ने किए ये बड़े खुलासे, जानिए

Corona in Bihar: बिहार में कोरोना का कहर जारी, अब तक 336 की मौत, संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 60 हजार के करीब

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