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Rajasthan Crisis : गहलोत सरकार ने राजधानी को छोड़ जैसलमेर को ही क्यों चुना ? जाने इनसाइड स्टोरी

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राजस्थान डेस्क: पिछले 20 दिनों से राजस्थान के सियासी घटनाक्रम (Rajasthan Crisis) पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं । राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और पूर्व पीसीसी चीफ और डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin pilot) के गुट के बीच सियासी वर्चस्व की लड़ाई लगातार जारी है। इस कहानी में हर दिन नया मोड़ आता है ,नया घटनाक्रम आता है और नए-नए ड्रामे सामने आते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में एक खेमा अशोक गहलोत का (Ashok Gehlot) है और दूसरा खेमा सचिन पायलट का है। पहले जुबानी जंग होती हैं, फिर बगावत होती है। उसके बाद अलग-अलग गुटों-ठिकानों में होटलों में बाड़ाबंदी होती हैं।स्पीकर नोटिस जारी करते हैं। आखिर में मामला हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है। सियासी घटनाक्रम लगातार घूमते-फिरते राजस्थान की जनता को चक्कर गिन्नी खिला रहा है। बीते 7 दिन में 1000 से ज्यादा करोना के मामले रोज आ रहे हैं। ऐसे में 20 रोज पहले से ही होटलों में कैद सरकार यानी गहलोत खेमे के सारे विधायक, मंत्री जयपुर के फेयर माउंट होटल को छोड़कर अब सुदूर पाकिस्तान बॉर्डर से सटे इलाके में जैसलमेर के सूर्य पैलेस होटल (Surya Hotal Place ) में जा ठहरें है।

ऐसे में सवाल खड़ा होता है,सरकार में होते हुए विधायकों और मंत्रियों को राजधानी में किस बात का डर सता रहा है। आखिरकार उनको ठिकाना क्यों ? बदलना पड़ रहा है। जब ठिकाना भी बदल रहे हैं,तो जयपुर में नहीं सुदूर बार्डर से सटे जैसलमेर का पांच सितारा होटल क्यो?

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जानिए जयपुर छोड़ने और नया ठिकाना जैसलमेर बनाने के पीछे की वजह हैं।

  • बीते दिनों अशोक गहलोत के करीबी व्यापारी राजीव अरोड़ा और धर्मेंद्र राठौड़ सहित कईयों के 40 से ज्यादा ठिकानों पर इनकम टैक्स के छापे पड़ने। ऐसे में केंद्रीय एजेंसी जयपुर में ज्यादा सक्रिय हो रही थी। बताया जा रहा कि राज्य सरकार को फेयरमोंट होटल में बड़ी कार्रवाई होने का अंदेशा था।
  • पिछले कई दिनों से गहलोत कैंप की बाड़ाबंदी वाले एरिया में लोगों की आवाजाही बढ़ गई थी। साथ ही जयपुर में बड़ाबंदी की जगह पर धरने प्रदर्शन शुरू हो गए थे। ऐसे में सरकार ऐसी जगह चाहती थी जहां आवाजाही कम हो। क्योंकि ऐसे हालातों में विधायक और सरकार असहज महसूस कर रही थी।
  • विधायकों को 20 से ज्यादा दिन होटल में ठहरे हो गए थे।ऐसे में विधायकों के परिजनों और करीबियों का होटल में आने-जाने का सिलसिला ज्यादा बढ़ गया। गहलोत कैंप विधायकों के परिजनों को बिना नाराज किए,इन पर रोक चाहता था।इसलिए सुदूर जैसलमेर को सुरक्षित ठिकाने के तौर पर चुना गया।
  • हालांकि सूत्रों के हवाले से खबर हैं, की जयपुर से बड़ाबंदी को सवाई माधोपुर व अन्य जगह पर शिफ्ट करने के लिए भी विचार हुआ था। लेकिन सीमाई इलाका होने और बाहरी लोगों की पहुंच आसान नहीं होने के कारण जैसलमेर को सबसे सुरक्षित ठिकाने के तौर पर चुना गया।
  • मुख्यमंत्री गहलोत के करीबियों का कहना है, की जैसलमेर की तनोट माता में गहलोत की आस्था है और तनोट माता की कृपा से वह सरकार बचा लेंगे। खबर तो यहां तक है कि विधायकों को माता के दर्शन करवाने भी ले जाया जाएगा।
  • बीते दिनों रणदीप सुरजेवाला ने कहा था “अगले 48 घंटे में पायलट कैंप से तीन विधायक जयपुर आएंगे” पर कोई नहीं आया। वही इस पर पलटवार करते हुए पायलट कैंप के उम्रदराज विधायक हेमाराम चौधरी ने कहा था “एक बार गहलोत बड़ाबंदी खोल कर देखें, उनके 15 से 20 विधायक हमारे संपर्क में हैं और टूटकर यहां आ जाएंगे” ऐसे में जयपुर में पायलट लॉबी के लोग सक्रिय होने का अंदेशा था। इसलिए गहलोत इनसे बचने के लिए जैसलमेर को चुना। क्योंकि जैसलमेर के कांग्रेस संगठन में पायलट की उतनी लोकप्रियता और पकड़ नहीं है, जबकि गहलोत का खासा दबदबा है। इसीलिए इसे सबसे सुरक्षित स्थान के तौर पर चुना गया।
  • कर्नाटक,मध्य प्रदेश, गोवा,मणिपुर, अरुणाचल यह सब वो जगह है। जहां अमित शाह बीते दिनों भाजपा की सरकार जोड़-तोड़ करके बना चुके है। ऐसे में केंद्रीय जांच एजेंसियां सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स सुबे में सक्रिय होने और अमित शाह के हर जगह सरकार बना लेने के ट्रेंड के चलते अशोक गहलोत विधानसभा सत्र शुरू होने तक एक सुरक्षित ठिकाना चाहते थे।
  • खैर, पल-पल बदलते राजस्थान के सियासी घटनाक्रम का असली में निचोड़ आगामी 14 अगस्त को होने वाले विधानसभा सत्र में ही निकल पाएगा, ऐसी उम्मीद है।

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