दिल्ली/पटना: लोकसभा चुनाव 2024 में बिहार में आरजेडी (RJD) के उम्मीद से कमतर प्रदर्शन के बाद से ही लालू प्रसाद यादव के परिवार में सब कुछ ठीक नहीं होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में एक चौंकाने वाली खबर ने खलबली मचा दी है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि लालू की बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya), जिन्होंने खुद सारण से चुनाव लड़ा था, हार के बाद से नाराज हैं और उन्होंने कथित तौर पर ‘परिवार से नाता तोड़ लिया’ है।
यह खबर सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गई है, जिसने लालू परिवार के भीतर चल रही ‘खलबली’ को सतह पर ला दिया है। आइए जानते हैं कि इस सनसनीखेज दावे में कितनी सच्चाई है।
हार के बाद से ही थीं ‘नाराज’?
रोहिणी आचार्य, जिन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी देकर सुर्खियां बटोरी थीं, इस बार सारण लोकसभा सीट से बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी के खिलाफ चुनावी मैदान में थीं। उन्हें इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें आ रही हैं कि रोहिणी आचार्य अपनी हार के लिए पार्टी के आंतरिक प्रबंधन और कुछ पारिवारिक फैसलों को जिम्मेदार मानती हैं। कहा जा रहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें परिवार और पार्टी से वैसा ‘खुला समर्थन’ नहीं मिला, जैसी उन्हें उम्मीद थी।
‘नाता तोड़ने’ की खबर का क्या है सच?
सोशल मीडिया और कुछ अपुष्ट राजनीतिक रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि रोहिणी आचार्य ने चुनाव परिणामों के बाद हुई समीक्षा बैठक में अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की थी।

इस दावे को तब और बल मिला जब यह अफवाह उड़ी कि रोहिणी ने परिवार के कुछ सदस्यों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर ‘अनफॉलो’ कर दिया है और कुछ पारिवारिक वॉट्सऐप ग्रुप भी छोड़ दिए हैं। इसी को ‘परिवार से नाता तोड़ने’ के तौर पर पेश किया जा रहा है।
कहा यह भी जा रहा है कि वह पार्टी की गतिविधियों से पूरी तरह दूरी बनाकर सिंगापुर वापस लौटने पर विचार कर रही हैं।
परिवार ने साधी चुप्पी, अटकलें जारी
हालांकि, इन गंभीर आरोपों और अटकलों पर अभी तक लालू परिवार या आरजेडी के किसी भी बड़े नेता की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। परिवार के करीबी लोग इसे ‘विरोधियों द्वारा फैलाई गई अफवाह’ और ‘परिवार को तोड़ने की साजिश’ करार दे रहे हैं।
उनका तर्क है कि हार के बाद हर पार्टी में समीक्षा होती है और नाराजगी एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, इसे ‘नाता तोड़ने’ जैसा बड़ा नाम देना गलत है
