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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की शुक्रवार को रीवा में एशिया के सबसे बड़े सौर प्लांट की शुरुआत

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मध्यप्रदेश। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रीवा में सौर प्लांट की शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज गरीब अपने घर में बिजली पैदा कर सकता है।  किसानों ने खेतों में अन्न के साथ-साथ बिजली पैदा करना भी शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के रीवा स्थित सबसे बड़े सौर प्लांट का उद्घाटन किया। यह प्लांट एशिया का सबसे बड़ा प्लांट है। जिसकी पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शुरुआत की। यहां अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज रीवा ने इतिहास रच दिया है। जब हम इस प्लांट का वीडियो आसमान से देखते हैं। तो लगता है हजारों सोलर पैनल फसल बनकर लहरा रहे हों। रीवा का सोलर प्लांट इस पूरे क्षेत्र को ऊर्जा का केंद्र बनाएगा, इससे एम.पी के लोगों को लाभ मिलेगा और दिल्ली में मेट्रो को भी बिजली मिलेगी।

राज्य में एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में बनी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में पीएम मोदी पहली बार किसी बड़ी योजना की शुरुआत कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के रीवा में 750 मेगावाट का सौर ऊर्जा परियोजना शुरू की जा रही है, जिसे एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना कहा जा रहा है. इसके जरिए दिल्ली मेट्रो को भी बिजली प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस बारे में जानकारी दी थी।  पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा है, ’10 जुलाई को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मध्य प्रदेश के रीवा में बने 750 मेगावाट की सौर परियोजना का उद्घाटन करूंगा।  यह सौर परियोजना 2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की हमारी प्रतिबद्धता को गति प्रदान करती है।’ बता दें कि रीवा की परियोजना में 250-250 मेगावाट की तीन सौर उत्पादन इकाइयां शामिल हैं। इस परियोजना से लगभग 15 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर कार्बन उत्सर्जन की संभावना है।

पीएम मोदी ने कहा कि अब रीवा वाला शान से कहेगा कि दिल्ली की मेट्रो हमारा रीवा चलाता है। इसका लाभ मध्य प्रदेश के गरीब, मध्यम वर्गीय लोगों, किसान और आदिवासियों को होगा। आज भारत सौर ऊर्जा के मामले में शीर्ष  देशों में शामिल है। पीएम ने कहा कि बिजली की जरूरतों के हिसाब से सौर ऊर्जा बेहद अहम है। सरकार इसे विस्तार दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए  इकॉनोमी एक जरूरी पक्ष है। वर्षों से यही मंथन है कि अर्थव्यवस्था की सोचें या पर्यावरण की, लेकिन भारत ने दिखाया है कि दोनों को एक साथ किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले कि कोरोना संकट के दौरान किसानों ने रिकॉर्ड तोड़ फसल उत्पादन किया और सरकार ने उसे खरीदा है। जल्द ही मध्य प्रदेश के किसान बिजली पैदा करने का रिकॉर्ड भी तोड़ देंगे। अब अपने देश में ही सोलर प्लांट से जुड़े सामान को भारत में बनाया जाएगा। आत्मनिर्भर भारत के तहत आयात पर इनकी निर्भरता कम की जाए और यहां पर इसके उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। अब सरकार का कोई भी विभाग अगर कोई सोलर प्लांट से जुड़ा कुछ सामान लेता है, तो वो मेक इन इंडिया को ही खरीदेगा।

अपने संबोधन में पीएम मोदी बोले कि हमारी सरकार के वक्त में स्वच्छ भारत, LPG देना, LED देना, सौर ऊर्जा समेत कई फैसले लिए गए, जिससे अर्थव्यव्स्था और पर्यावरण सर्वोपरि है। पीएम ने कहा कि पिछले 6 साल में सरकार ने 36 करोड़ LED बल्ब बांटे हैं, 1 करोड़ से ज्यादा स्ट्रीट लाइट्स में लगाई हैं। हमारी सरकार ने LED की कीमत को दस गुना घटा दी है। पीएम ने कहा कि इससे 600 अरब यूनिट बिजली की बचत हो रही है, हर साल लोगों का बिजली का बिल कम आ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2014 से पहले सोलर पावर की कीमत ज्यादा थी, लेकिन अब कीमत काफी कम कर दी गई है। भारत अब क्लीन एनर्जी का सबसे शानदार मार्केट बन गया है, इस क्षेत्र में अब भारत एक मॉडल बन चुका है। भारत इस क्षेत्र में पूरी दुनिया को इकट्ठा कर रहा है, ताकि दुनिया का बड़ा संकट खत्म हो सके। अब एक आम आदमी घर की छत से लेकर बगीचे तक में बिजली पैदा कर रहा है। इसके साथ ही अन्न दाता को ऊर्जा दाता बनाया जा रहा है। जिस जमीन पर किसान को फसल उगाने में दिक्कत आती है, अब वो वहां पर प्लांट लगा रहा हैं। 

 

 

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पार्टी पद देती है, ले भी सकती है: कांग्रेस से सुलह के बाद पहली बार बोले पायलट

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New Delhi: Rajasthan Crisis Ends: राजस्थान की सियासत में सोमवार का दिन बेहद अहम रहा. 32 दिनों बाद पार्टी के खिलाफ बगावत करने वाले सचिन पायलट(Sachin Pilot) ने सुलह का रास्ता अपनाया. दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने पहली बार देर रात मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा कि लड़ाई पद के लिए नहीं, आत्मसम्मान के लिए थी. पार्टी पद देती है, तो पार्टी पद ले भी सकती है. पायलट ने कहा कि लंबे समय से कुछ मुद्दों को मैं उठाना चाहता था. मुद्दे वैचारिक थे और उन्हें उठाना जरूरी था.

सचिन पायलट ने कहा कि मैं शुरू से ही कह रहा हूँ कि ये लड़ाई आदर्शों पर थी. मैंने हमेशा ही सोचा था कि पार्टी हित में इन मुद्दों को उठाना जरूरी है. पूर्व पीसीसी अध्यक्ष पायलट(Sachin Pilot) ने कहा कि मैंने अपनी बात बेबाकी के साथ रखी. मुझे खुशी है की कांग्रेस अध्यक्षा और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि जल्दी ही मुद्दों का हल कर लिया जायेगा.

बीते एक महीनों से दिल्ली में ठहरे सचिन पायलट ने कहा कि मुझे पद की बहुत लालसा नहीं है, लेकिन मैं चाहता था कि जो मान-सम्मान-स्वाभिमान की बात हम करते थे वो बनी रहे. हमने हमेशा कोशिश की है कि जिनकी मेहनत से सरकार निर्माण हुआ है उन लोगों की हिस्सेदारी, भागेदारी सुनिश्चित की जाए. मेरी शिकायत का समाधान होगा.

वहीं, राजस्थान में सियासी संकट को सुलझाने(Rajasthan Crisis Ends) के लिए कांग्रेस नेताओं की बैठकों और बातचीत का दौर देर रात तक जारी है. दिन में सचिन पायलट राहुल और प्रियंका के मुलाक़ात के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गांधी ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत से बातचीत कर संकट सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया. जिसमे प्रियंका गाँधी, केसी वेणुगोपाल और अहमद पटेल को जिम्मेदारी मिली.

पायलट की शिकायतों को सुलझाने के लिए कांग्रेस की रफ़्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीन सदस्यीय कमेटी के गठन होते ही प्रियंका गाँधी, केसी वेणुगोपाल और अहमद पटेल देर रात राजधानी दिल्ली की 15 जीआरजी रोड स्थित कांग्रेस के वार रूम पहुंचे. यहां तीनों शीर्ष नेताओं ने सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों से बातचीत की.

बताया जा रहा है कि पायलट की कांग्रेस में वापसी का फॉर्मूला तलाशा जा रहा है, लेकिन पार्टी ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री पद के बारे में फिलहाल कोई बात नहीं होगी. एडजस्टमेंट के लिए पार्टी के खिलाफ बगावत करने वाले पायलट को कुछ वक़्त का इंतजार करना पड़ेगा.

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पायलट की शिकायतों को दूर करने के लिए बनी 3 सदस्यीय कमेटी, प्रियंका भी शामिल

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Priyanka Gandhi is in 3-member committee: राजस्थान में 32 दिनों से जारी सियासी घमासान का द एंड होता दिख रहा है. सोमवार को सचिन पायलट सहित उनके कैंप के विधायकों ने पार्टी के शीर्ष नेताओ से मुलाक़ात की. राहुल गाँधी से मुलाक़ात कर सचिन पायलट ने दलील दी कि वो पार्टी के खिलाफ कभी नहीं थे. उनका पूरा गुस्सा स्टेट लीडरशिप के खिलाफ है. राहुल गाँधी संग मुलाक़ात के बाद कांग्रेस ने पायलट के साथ समझौते की पुष्ट‍ि कर दी है.

राहुल गाँधी के साथ सचिन पायलट के मुलाक़ात के दौरान कांग्रेस महसचिव प्रियंका गाँधी(Priyanka Gandhi) भी मौजूद रही. कांग्रेस ने पायलट को आश्वासन द‍िया है कि उनकी सारी श‍िकायतों पर गौर क‍िया जाएगा और सम्मानजनक तरीके से उनकी घर वापसी कराई जाएगी. संगठन महसचिव और राज्यसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने पूरे घटनाक्रम पर एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर जानकारी दी कि पायलट के श‍िकायतों को सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है.

ताजा जानकारी के मुताबिक सचिन पायलट के शिकायतों को दूर करने के लिए बने तीन सदस्यीय कमेटी में प्रियंका गांधी वाड्रा(Priyanka Gandhi is in 3-member committee), वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल को रखा गया है. उधर, सचिन पायलट के पार्टी के शीर्ष नेताओ से बैठक के बाद पायलट कैंप के विधायक भंवरलाल शर्मा(Bhanwar Lal Sharma) भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने पहुंचे. उन्होंने सूबे की गहलोत सरकार को पूरे तरह से सेफ बताया.

‘डील’ वाले ऑडियो टेप का हिस्‍सा बताए गए बागी MLA भंवरलाल शर्मा ने सीएम गहलोत से मुलाक़ात के बाद कहा कि सरकार को कोई खतरा नहीं है. सरकार सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि पार्टी एक परिवार है और अशोक गहलोत उसके मुखिया. जब परिवार में कोई नाराज होता है तो वो खाना नहीं खाता. हमने एक महीने तक नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि अब नाराजगी दूर हो गई है.

वहीं, सचिन पायलट के एडजस्टमेंट फार्मूला को लेकर पार्टी सूत्रों की माने तो राहुल-पायलट की मुलाकात में यह साफ हो चुका है कि कांग्रेस तुरंत मुख्यमंत्री बदलने को राजी नहीं है, क्योंकि इससे गलत संदेश जाएगा, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने पायलट से वादा किया कि है कुछ महीनों बाद राजस्थान का मुख्यमंत्री बदला जाएगा. लेकिन यह भी साफ़ है कि पायलट गहलोत की जगह नहीं ले पायेंगे. हालाँकि फ़िलहाल कुछ भी होने के लिए पायलट कैंप को इंतजार करना पड़ेगा.

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देर-सबेर गहलोत की कुर्सी जानी तय, पर पायलट को भी नहीं मिलेगी, ये है फार्मूला

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Adjustment Formula for Sachin Pilot: राहुल गाँधी संग सचिन पायलट के मुलाक़ात के बाद मरुधरा के सियासी समीकरण बदल गए है. इस बात में कोई दोराय नहीं है. कल तक गहलोत सरकार के अल्पमत में होने का दावा करने वाली बीजेपी अब बैकफूट पर आ गयी है. लेकिन इस सब के बीच एक सवाल अब भी वही ठहरा है कि पायलट के पार्टी वापसी पर आखिर एडजस्टमेंट फार्मूला(Adjustment Formula for Sachin Pilot) क्या है. जिस पर बीतें 32 दिनों से बगावत का रुख अख्तियार करने वाले पायलट सहमत हो गए है. क्या पार्टी ने पायलट के मांग को मान लिया है?

पार्टी सूत्रों की माने तो फ़िलहाल किसी एडजस्टमेंट फार्मूला पर काम शुरू नहीं होगा. लेकिन फार्मूला पर बातचीत जारी रहेगी और देर-सबेर यह लागू भी होगा. लेकिन राहुल गाँधी(Rahul Gandhi) और सचिन पायलट(Sachin Pilot) की मुलाकात के बाद यह साफ़ है कि प्रदेश की गहलोत सरकार पर मंडराता खतरा फ़िलहाल के लिए टल गया है. यानी मुलाकात के बाद स्पष्ट है कि बागी विधायक आगामी सत्र में सरकार का समर्थन करेंगे.

सियासी जानकार और पार्टी सूत्र बताते है कि राहुल-पायलट(Sachin Pilot Met With Rahul Gandhi) की मुलाकात में यह साफ हो चुका है कि कांग्रेस तुरंत मुख्यमंत्री बदलने को राजी नहीं है, क्योंकि इससे गलत संदेश जाएगा, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने पायलट से वादा किया कि है कुछ महीनों बाद राजस्थान का मुख्यमंत्री बदला जाएगा. कांग्रेस ने पायलट से साफ़ कर दिया है कि अगर वापस लौटे है तो एडजस्टमेंट के लिए थोड़ी सब्र रखे.

हालाँकि सूत्रों की माने तो राहुल-पायलट की मुलाकात के बाद यह तो तय हुआ है कि कुछ महीने बाद राजस्थान में सीएम बदलेगा. लेकिन जानकारों का कहना है कि नए फार्मूले में सचिन के हाथ सीएम का पद आना मुश्किल है, क्योंकि गहलोत खेमा उनके सीएम बनने का विरोध करेगा. ऐसे में मुख्यमंत्री कोई तीसरा ही बन सकता है.

पायलट(Sachin Pilot) कांग्रेस से सुलह पर राजी क्यों हो गए? इस सवाल के जवाब में जानकार की माने तो बागी तेवर के बाद भी अंदरखाने पायलट की वापसी के कोशिशें लगातार चल रही थी. पार्टी के अन्दर एक ऐसा धरा मौजूदा था, जो पायलट से हमदर्दी रखता था. इनमे से कई लोगो ने खुले तौर पर भी इसका इजहार किया था. दूसरी बात ये है कि पायलट नंबर गेम में भी पिछर रहे थे. पायलट को उम्मीद थी कि उनके साथ 30 विधायक आ जाएंगे, लेकिन उन्हें सिर्फ 22 विधायकों का ही समर्थन मिला.

वहीं पूर्व सीएम राजे की चुप्पी से भी पायलट को लग गया की भाजपा प्रदेश सरकार गिराने में दिलचस्पी नहीं ले रही है. यही वजह था कि लगभग एक महीने बाद सचिन पायलट ने वापस अपने पुराने घर में ही ठिकाना खोजने की पहल की.

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राहुल संग पायलट मुलाक़ात पर बोली BJP- अच्छा हुआ, हमारा होटल का खर्चा बच गया

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Satish Poonia on Sachin Pilot- Rahul Gandhi Meeting: राहुल और प्रियंका गाँधी के साथ सचिन पायलट(Sachin Pilot) के मुलाक़ात के बाद राजस्थान में 32 दिनों से चले आ रहे सियासी घमासान का फ़िलहाल अंत होता दिख रहा है. शह-और मात के इस खेल में अब साफ़ हो गया है कि कांग्रेस और खासकर सीएम गहलोत ने बाजी मार ली है. लेकिन इस सब के बीच राजस्थान में गहलोत सरकार के गिरने की राह देख रही भाजपा अब कहीं न कहीं बैकफूट पर आ गयी है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से पूर्व पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट के मुलाक़ात की खबर आम होने के बाद प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया(Satish Poonia) जयपुर में पार्टी दफ्तर पहुंचे. यहाँ उन्होंने मीडियाकर्मियों से बातचीत की. ताजा घटनाक्रम पर सतीश पुनिया ने कहा, ‘अच्छा है. हमारा होटल का खर्चा बच गया. मुझे नहीं लगता जिस तरह के हालात बने हैं, उसमें यह राजस्थान में कोई स्थिर और मजबूत सरकार चला पाएंगे.’

बीजेपी के राजस्थान इकाई के अध्यक्ष सतीश पूनिया(Satish Poonia) ने अशोक गहलोत के इस्तीफे तक की मांग कर डाली. उन्होंने सीएम गहलोत और पायलट पर निशाना साधते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में जिन्होंने नायक बनने की कोशिश की, वे खलनायक हैं. यदि पार्टी उनसे समझौता भी नहीं करती तो भी इन दिनों दोनों ने देश और दुनिया में राजस्थान की छवि को तार-तार कर किया. राजस्थान की छवि को खराब करने के लिए अशोक गहलोत को नैतिकता के आधार पर अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए.

विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले गहलोत सरकार को समर्थन देने वाले विधायकों के बारेबंदी पर तंज करते हुए पुनिया ने कहा कि 31 दिन के खर्चे का कुछ हिसाब-किताब आया है. सवा 4 करोड़ रुपए रहने में खर्च हुआ है. कुल 10 करोड़ रुपए का खर्चा किया गया है. वहीं, जो हवा में उड़कर गए हैं, उसका हिसाब आना बाकी है.

हालाँकि बारेबंदी को लेकर कांग्रेस सरकार पर तंज कसने वाले प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया से जब भाजपा की ओर से किये गए बारेबंदी को लेकर सवाल किया गया. तो वो सवालों से कन्नी काटते नजर आये. खानापूर्ति के लिए उन्होंने महज इतना कहा कि बाड़ेबंदी शब्द भाजपा की डिक्शनरी में नहीं है. उल्लेखनीय है कि रविवार को आधा दर्जन से अधिक बीजेपी विधायकों को गुजरात रवाना किया गया था. आने वाले दिनों में और विधायकों को गुजरात और मध्यप्रदेश शिफ्ट किये जाने की खबर थी. लेकिन ताजा घटनाक्रम के बाद ऐसा होने की सम्भावना कम है.

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CM गहलोत से मिले पायलट कैंप के विधायक, बोले- नाराजगी दूर हो गई, सरकार सेफ

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Jaipur: राजस्थान के सियासत में सोमवार को घटनाक्रम एक बार फिर काफी तेजी से बदल रहे है. गहलोत सरकार के खिलाफ बागवत की बिगुल फूंकने वाले पूर्व पीसीसी चीफ व पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सोमवार की शाम दिल्ली में राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात की. इसके बाद पायलट कैंप के विधायक भंवरलाल शर्मा(Bhanwar Lal Sharma) भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने पहुंचे. उन्होंने सूबे की गहलोत सरकार को पूरे तरह से सेफ बताया. यहाँ बता दें कि भंवरलाल शर्मा वही विधायक है जिनसे राजस्थान एसओजी ने विधायकों के खरीद-फरोख्त से जुड़े ऑडियो मामले में पूछताछ की पहल की थी. हालाँकि अब केस बंद हो गया है.

मुख्यमंत्री गहलोत से मुलाकात के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में विधायक भंवरलाल शर्मा(Bhanwar Lal Sharma) ने कहा कि सरकार को कोई खतरा नहीं है. सरकार सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि पार्टी एक परिवार है और अशोक गहलोत उसके मुखिया. जब परिवार में कोई नाराज होता है तो वो खाना नहीं खाता. हमने एक महीने तक नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि अब नाराजगी दूर हो गई है.

विधायकों के खरीद-फरोख्त से जुड़े ऑडियो के मामले में सवाल किये जाने पर भंवरलाल शर्मा(Bhanwar Lal Sharma) ने कहा कि मुझे इस संबंध में कोर्ई जानकारी नहीं है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक विधायक भंवरलाल ने कहा कि मैं एक गजेंद्र सिंह को जानता हूं. मैं किसी शेखावत को नहीं जानता. उन्होंने कहा कि कोई ऑडियो नहीं है. यह झूठ था. मैं संजय जैन को नहीं जानता.

उल्लेखनीय है कि सरकार गिराने की साजिश से जुड़े ऑडियो जारी होने के बाद राजस्थान की सियासत में जो भूचाल आया था. उसमे विधायक भंवरलाल शर्मा का भी नाम आया था. राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की टीम इस बाबत भंवरलाल शर्मा से पूछताछ करने के लिए हरियाणा के गुरुग्राम भी गई थी. लेकिन एसओजी को तब कामयाबी नहीं मिल पाई थी. हालांकि अब इस मामले में दर्ज तीनो ही एफआईआर को राज्य की विशेष जांच बल ने वापस ले लिया है.

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32 दिनों से जारी विवाद का द एंड? राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट

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New Delhi: Sachin Pilot meets Rahul, Priyanka: राजस्थान के सियासी घमासान का आज 32वां दिन है. और सोमवार को मरुधरा के सियासी संकट में एक बार फिर नया मोड़ आया है. सचिन पायलट ने दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मुलाकात की है. राहुल और पायलट के बीच बातचीत का ये क्रम तक़रीबन डेढ़ घंटे तक चला है.

राहुल संग पायलट के मुलाक़ात(Sachin Pilot meets Rahul) के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) भी मौजूद रही. इससे पहले सोमवार की सुबह से ही इस बात की हलचल तेज थी कि सचिन पायलट और अन्य बागी विधायक कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते है. बताया यह भी जा रहा है कि पायलट ने रविवार को एआईसीसी के किसी बड़े नेता से मुलाक़ात की थी. जिन्होंने राहुल संग उनकी बैठक को फिक्स कराया.

पार्टी सूत्र इस ताजा घटनाक्रम को लेकर बताते है कि फ़िलहाल पायलट की कांग्रेस में वापसी का फॉर्मूला तलाशा जा रहा है, लेकिन पार्टी ने दो टूक में स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री पद के बारे में फिलहाल कोई बात नहीं होगी. लिहाजा पायलट अगर लौटना चाहें तो एडजस्टमेंट के लिए कुछ समय इंतजार भी करना पड़ेगा.

सूत्र बताते है कि राहुल गाँधी से मुलकात में सचिन पायलट ने अपनी दलील रखी कि आखिर क्यों उन्हें बगावत का कदम उठाना पड़ा. बताया जा रहा है कि सचिन पायलट ने राहुल गाँधी से कहा कि वह कांग्रेस के खिलाफ नहीं थे, वो केवल सीएम गहलोत का विरोध कर रहे थे. गौर करने वाली बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम राजस्थान विधानसभा सत्र बुलाए जाने के पांच दिन पहले हुआ है. जहां अशोक गहलोत अपना बहुमत साबित करने का दावा कर रहे हैं.

इस सब के बीच पायलट खेमे के कुछ विधायकों को मनाने में कांग्रेस पार्टी कामयाब हो चुकी है. 14 अगस्त को राज्य में विधानसभा का सत्र बुलाया गया है. लेकिन इससे पहले मोटे तौर अपर यह साफ़ हो गया है कि फ़िलहाल कांग्रेस की सरकार सेफ जोन में है. और गहलोत सरकार पर मंडरा रहा खतरा टल गया है.

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पार्टी पद देती है, ले भी सकती है: कांग्रेस से सुलह के बाद पहली बार बोले पायलट

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