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Coronavirus Medicine: कोरोना वायरस की पहली आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल बनकर तैयार, पतंजलि आज करेगी ऐलान

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पूरी दुनिया में महामारी के रूप में तबाही मचाने वाले कोविड-19 यानी कोरोना वायरस (corona virus) के इलाज की अनगिनत कोशिशें जारी हैं, लेकिन इस बीच स्वामी रामदेव का संस्थान पतंजलि (Patanjali) मंगलवार यानी आज कोविड-19 की पहली आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल (Ayurvedic Medicine) को पूर्ण वैज्ञानिक विवरण के साथ भारत में लॉन्च करने जा रहा है.

कोरोना वायरस (corona virus in India) की पहली आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल को मंगलवार दोपहर 1 बजे हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आचार्य बालकृष्ण लॉन्च करेंगे. इस खास अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव भी मौजूद रहेंगे.

बता दें कि, पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन्स की तरफ से पतंजलि आज दोपहर 1 बजे कोरोना वायरस (corona virus cases in India) संक्रमितों पर रैंडमाइज्ड प्लेसबो नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल के परिणाम को पेश करेगा. पतंजलि योगपीठ के द्वारा जारी किए गए सूचना में कहा गया कि, हमें आपको यह बताते हुए काफी खुशी हो रही है कि योगगुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण कोरोना वायरस के इलाज में प्रमुख सफलता को आज पूरे भारत के सामने साझा करेंगे और जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है कि वे आज इसका खुलासा भी करेंगे. क्लिनिकल ट्रायल (Clinical Trial) में शामिल सभी वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और शोधकर्ताओं की टीम भी मौजूद रहेगी.

बता दें कि, यह रिसर्च संयुक्त रूप से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (NIMS), जयपुर और पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट (PRI), हरिद्वार के द्वारा किया गया है. साथ ही इस दवा का निर्माण पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, हरिद्वार और दिव्य फार्मेसी, हरिद्वार के द्वारा किया जा रहा है.

देश में कोरोना का कहर जारी-

स्वास्थ्य मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में पिछले 24 घंटों के अंदर 7,390 मरीज पूरी तरह से ठीक हुए हैं. अब तक इस खतरनाक वायरस से जंग लड़कर ठीक होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 1,94,324 हो गई है. वहीं, देश में अभी सक्रिय मामलों की संख्या 1,60,385 है. महाराष्ट्र में कोविड-19 के कुल संक्रमितों का आंकड़ा 1.16 लाख के पार है, वहीं देश की राजधानी दिल्ली में 62,000 से अधिक कुल संक्रमित हैं.

 


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राजस्थान: SOG ने हॉर्स ट्रेडिंग मामले में राजद्रोह की धारा हटाई, केस ACB को ट्रान्सफर हुआ

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राजस्थान: सूबे में सियासी उठापटक का आज 26वां दिन है. सचिन पायलट सहित उनके कैंप के बागी विधायकों के पार्टी में वापसी के सुगबुगाहट के बीच विधायकों के हॉर्स ट्रेडिंग से जुड़े मामले में एक बड़ी खबर सामने आई है. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग यानी खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को ट्रांसफर कर दिया है. साथ ही राजद्रोह की धारा भी हटा ली गई है.

मालूम हो कि सचिन पायलट सहित उनके कैंप के बागी विधायकों को राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने राजद्रोह की धारा के तहत ही नोटिस दिया था. जिस पर सचिन पायलट सहित उनके कैंप के विधायकों ने करा एतराज जताते हुए अपने स्वाभिमान से भी जोड़ा था. पायलट खेमे को जो नोटिस भेजा गया था, उसमें आईपीसी की धारा 124ए और 120बी का जिक्र था. इसमें से धारा 124ए से देशद्रोह से जुड़ी है.

रिपोर्ट्स की माने तो कोई भी नागरिक सरकार विरोधी बात लिखता या बोलता है या फिर उसका समर्थन करता है या राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो उस पर इस धारा के तहत केस दर्ज होता है. इस मामले में दोषी पाए जाने पर 3 साल की सजा से लेकर उम्र कैद तक हो सकती है.

इस सब के बीच सचिन पायलट सहित उनके कैंप के बागी विधायकों के पार्टी में वापसी की सुगबुगाहट ने एक बार फिर से रफ़्तार पकड़ लिया है. बागी विधयाकों को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह खबर सामने आई कि वे पार्टी से बाहर नहीं जाना चाहते, लेकिन राजस्थान में मुख्यमंत्री का चेहरा बदलना चाहिए. बताया गया कि उन्होंने आलाकमान से मांग की है कि अगर सीएम के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति पर विचार किया जाता है, तो वे सभी पार्टी के साथ हैं. हालाँकि पार्टी के भीतर किसी ने भी इसकी पुष्टि नहीं की.

बाद में सोमवार दोपहर को जैसलमेर कांग्रेस की ओर से जैसलमेर में प्रेस कांफ्रेंस को संबोंधित करने आये रणदीप सुरजेवाला ने इस सवाल के जवाब में कि क्या बागी विधायकों ने पार्टी में वापसी के लिये कोई शर्त रखी है, कहा कि सबसे पहले बागी विधायक वार्तालाप करें और उसको करने के लिए पहली शर्त है कि भाजपा की मेजबानी छोड़ें. मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली हरियाणा की भाजपा सरकार का सुरक्षा चक्र छोड़ें.

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बागी विधायकों के वापसी शर्त पर बोली कांग्रेस- पहले BJP से दोस्ती तोड़ घर लौटें

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कल तक गहलोत सरकार पर मंडराते संकट को लेकर चर्चा में बने राजस्थान में अब सवाल इस बात पर आकर टिक गई है कि आख़िरकर सचिन पायलट सहित उनके कैंप के बागी विधायकों का अगला स्टैंड क्या होगा. गहलोत कैंप के विधायकों के जैसलमेर शिफ्टिंग के बाद बागी कांग्रेस विधायकों के पार्टी में वापसी के सुगबुगाहट तेज हो गए है. इस सब के बीच कांग्रेस ने साफ़ कर दिया है कि जब तक राजस्थान के बागी कांग्रेस विधायक हरियाणा के मानेसर स्थित रिसोर्ट से वापस राजस्थान नहीं आ जाते है. पार्टी कोई सुनवाई नहीं करेगी.

मंगलवार को जैसलमेर में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि राजस्थान के बागी कांग्रेस विधायकों को वापसी के लिए बातचीत से पहले भाजपा से दोस्ती तोड़नी होगी तथा उसकी मेजबानी छोड़कर घर लौटना होगा.

राजस्थान कांग्रेस की स्टेट लीडरशिप और खासकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok gehlot) के नेतृत्व से नाराज होकर पार्टी से बगावत करने वाले सचिन पायलट (Sachin Pilot) सहित 19 कांग्रेस विधायकों की पार्टी में वापसी की संभावना के सवाल पर सुरजेवाला ने कहा,”सबसे पहले बागी विधायक वार्तालाप करें और उसको करने के लिए पहली शर्त है कि भाजपा की मेजबानी छोड़ें. मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली हरियाणा की भाजपा सरकार का सुरक्षा चक्र छोड़ें.”

इस दौरान सुरजेवाला ने हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर नित गठबंधन सरकार पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा,”हरियाणा में आए दिन बच्चों की हत्याएं हो रही है, सामूहिक दुष्कर्म हो रहे हैं, गुड़गांव में लोगों को सरेराह पीटा जा रहा है और इसके लिए पुलिस उपलब्ध नहीं लेकिन इन 19 विधायकों की सुरक्षा के लिए एक हजार के करीब पुलिस कर्मी लगाए गए हैं. कांग्रेस के नाराज विधायकों को भाजपा जो सुरक्षा दे रही है उसके क्या मायने हैं. ”

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरजेवाला ने आगे कहा,” …इसलिए बागी विधायक पहले भाजपा की आवभगत छोड़ें ..पहले भाजपा से मित्रता तोड़ें, पहले भाजपा का साथ छोड़ें, उसकी मेहमाननवाजी छोड़ें, पहले भाजपा का सुरक्षा चक्र तोड़े अपने घर वापसी करें तब वार्तालाप होगा.”

उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत सरकार को समर्थक देने वाले तमाम कांग्रेस व निर्दलीय विधायक जैसलमेर के एक निजी होटल में रुके हुए हैं. जबकि सचिन पायलट सहित उनके कैंप के 19 बागी विधायकों के हरियाणा के मानेसर स्थिति एक रिसोर्ट में ठहरने की खबर है. इस सब के बीच अब 14 अगस्त से राज्य विधानसभा का सत्र भी आहूत होना है.

इसे भी पढ़ें: कब अयोग्य घोषित हो जाते है विधायक? इन 5 बिन्दुओं में आसानी से समझिये क्या है दल-बदल कानून

जैसलमेर में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने 5 अगस्त को होने वाले श्री राम जन्म भूमि मंदिर के भूमि पूजन को लेकर कहा कि राम का चरित्र सर्वांगीण है. राम सभी हैं. गांधी के रघुपति राजा राम सबको सम्मति देने वाले हैं. राम शक्ति की मौलिक कल्पना हैं. राम संकल्प हैं. सहयोगी हैं. सबके हैं. आगामी 5 अगस्त को रखा गया शिलान्यास सांस्कृतिक समागम का प्रतीक बनेगा.

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बिहार विधानसभा में तेजस्वी के भाषण से गदगद है बड़े भाई तेज, बोले.. शाबाश अर्जुन

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बिहार में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने है. इससे पहले सोमवार को विधानसभा में एक दिवसीय मानसून सत्र की बैठक हुई. मानसून सत्र में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का संबोधन सबके बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, मंगलवार को सदन में बीते कई दिनों से बिहार की नीतीश सरकार को स्वास्थ्य व्यवस्था के बदहाल स्थिति और कोरोना पर काउंटर करते आये तेजश्वी पूरे फॉर्म में दिखे.

सदन में राज्य की स्वास्थ्य बदहाली और बाढ़ आपदा पर आंकड़ो के साथ तेजश्वी इस तरीके से मुखर थे कि सरकार से जवाब देते नहीं बन रहा था. तेजस्वी ने सत्र के दौरान कहा कि, ” सरकार के सामने हमने आंकड़े रखे, रियल पिक्चर रखा जो धरातल की बात है. आप लोगों ने भी कोरोना और बाढ़ के संबंधित कई वीडियो देखा होगा. लेकिन सरकार के पास कोई जवाब नहीं है, वो गोल-मटोल और केवल कागजी बात कह रही है और बस अधिकारियों पर निर्भर है. मुख्यमंत्री से कहा जा रहा है कि आप बाहर निकलें, इसपर कोई जवाब नहीं आ रहा, सुशांत सिंह राजपूत मामले में सीबीआई जांच की मांग करानी हो या हमने जो फिल्मसिटी की बात की थी उसपर भी कोई जवाब नहीं मिला, बाढ़ को लेकर इनकी क्या तैयारी है वो भी स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया. सरकार बस लीपा-पोती कर रही है.”

तेजस्वी यादव के नीतीश सरकार पर इस आक्रमक रवैये को देखकर उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव भी गदगद है. तेज प्रताप यादव ने आधी रात अपने छोटे भाई तेजश्वी के भाषण के प्रति अपने ख़ुशी का इजहार भी किया. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘शाबाश अर्जुन, ज्ञान भवन में अपनी ओजस्विता से सुशासनी राक्षसों को असल ज्ञान का प्राप्त करवाने हेतु अथाह आशीर्वाद.’

दरअसल मानसून सत्र के दौरान तेजस्वी यादव जब नीतीश सरकार पर हमला बोल रहे थे. तब तेजप्रताप उनकी ठीक बगल में बैठे थे. तेजप्रताप भी बीच-बीच में उठकर नीतीश सरकार पर हल्ला बोल रहे थे लेकिन तेजस्वी यादव इस कदर आक्रमक थे कि तेज प्रताप एक तक अपने छोटे भाई के भाषण को सुनते रहे.

तेजस्वी यादव ने सत्र के दौरान नीतीश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “बिहार पूरी तरह से भगवान भरोसे है. मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को गंभीर होना चाहिए जब नेता प्रतिपक्ष बोल रहा है तो उनको सदन में रहना चाहिए और जितने भी सवाल हमने पूछे हैं, चाहे वो नीति आयोग की बात हो या तीन सदस्यीय टीम के बारे में हो उसका जवाब देना चाहिए. ये तो उन्हीं के घटक दल की सरकार की रिपोर्ट है तो हम ये कहना चाहते हैं बाढ़ हो या कोरोना सरकार पूरी तरह से फेल है. इन लोगों को केवल चुनाव की चिंता है.”

यह भी पढ़ें: बिहार सरकार ने सुशांत सुसाइड केस में सीबीआई जांच की सिफारिश की

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, “बाढ़ को लेकर अगर हम चर्चा करें तो लगभग 14 से 15 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं,113 प्रखंड और 1060 पंचायत और लगभग 54 लाख आबादी बाढ़ पीड़ित हैं. घर-बार डूब गया, सभी लोग रोड पर रह रहे हैं. हम जाकर पीड़ितों से मिल सकते हैं. मैं मधुबनी, दरभंगा, चंपारण गया, तिरहुत, गोपालगंज की स्थिति आप देख लीजिए भयावह स्थिति बनी हुई है. लेकिन अभी तक कहने के बाद केवल एक हेलीकॉप्टर गया है. अगर मुख्यमंत्री को कोरोना का डर है तो हेलीकॉप्टर तो है न उनके पास केवल पायलट को लेकर ही चल जाते.”

बता दें कि यह 16 वीं विधानसभा का अंतिम सत्र था. जो सोमवार को ख़त्म हो गया. अब इसके बाद सभी पार्टियाँ विधानसभा चुनाव(Bihar Assembly Election 2020) के लिए जाएँगी. लेकिन इस पर भी विरोधाभास जारी है. जहाँ मुख्य विपक्षी दल आरजेडी और खुद एनडीए का हिस्सा लोजपा कोरोना महामारी और बाढ़ आपदा के मद्देनजर चुनाव टालने की मांग कर रही है. वही सत्ताधारी दल जदयू समय पर चुनाव संपन्न कराने के पक्ष में है. हालाँकि इस पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग को लेना है. जिसके तरफ से अभी तक अधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है.

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कोरोना पॉजिटिव पाए गए कर्नाटक के पूर्व CM सिद्धारमैया, अस्पताल में भर्ती

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Bengaluru: कर्णाटक कांग्रेस के दिग्गज नेता व सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री रहे एस सिद्धारमैया की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. मंगलवार सुबह को खुद पूर्व मुख्यमंत्री एस सिद्धारमैया ने ट्वीट कर अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी दी. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कोरोना टेस्ट में वो पॉजिटिव निकले हैं और डॉक्टरों की सलाह पर वो अस्पताल में भर्ती हैं. बता दें कि इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए है.

कर्णाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाल के दिनों में अपने से मिलने वाले सभी लोगो से कोरोना टेस्ट करवाने की अपील की है. पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे ने बताया कि उनके पिता को सोमवार को बुखार आया था, जिसके बाद उनका कोरोना एंटीजन टेस्ट कराया गया, जिसमें वो कोरोना पॉजिटिव निकले हैं.

इससे पहले खुद कोरोना पॉजिटिव पाए गए राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी मिलने के बाद ट्वीट कर उनके शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की है. कर्णाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कन्नड़ में एक ट्वीट कर सिद्धारमैया को टैग करते हुए लिखा, ‘पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता सिद्धारमैया जी के कोरोना संक्रमण की खबर सुनकर हैरान हूं. मेरी कामना है कि वो जल्दी इससे ठीक हो जाएं और फिर से लोगों की सेवा में जुटें.’

मालूम हो कि मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का रविवार को कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया था. साथ ही उनके दफ्तर में काम करने वाले छह कर्मचारी भी कोरोना संक्रमित निकले हैं. रिपोर्ट्स की माने तो सोमवार को उनकी एक बेटी भी इस खतरनाक वायरस से संक्रमित पाई गई हैं. फ़िलहाल येदियुरप्पा और उनकी बेटी मणिपुर अस्पताल में भर्ती हैं.

यह भी पढ़ें: भूमि पूजन के ‘अशुभ मुहूर्त’ के कारण कोरोना संक्रमित हुए शाह, शिवराज: दिग्विजय सिंह

कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच देशभर के कई बड़े नेता पिछले एक हफ्ते में कोरोना पॉजिटिव निकले है. इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह भी रविवार को कोरोना पॉजिटिव निकले हैं, उनका गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा है. वहीं, मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी का भी बीते दिनों कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया. जिसके बाद वो सूबे की राजधानी भोपाल के चिरायुं अस्पताल में भर्ती है.

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देश

भूमि पूजन के ‘अशुभ मुहूर्त’ के कारण कोरोना संक्रमित हुए शाह, शिवराज: दिग्विजय सिंह

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5 अगस्त को उत्तरप्रदेश के अयोध्या में श्री राम जन्म मंदिर का भूमि पूजन होना है. लेकिन भूमि पूजन से पहले कोरोना वायरस संक्रमण ने अयोध्या को भी अपने जद में ले लिया है. राम जन्मभूमि के पुजारी प्रदीप दास सहित यहाँ सुरक्षा में लगे 16 पुलिसकर्मी भी कोरोना संक्रमित पाए गए है. वहीं, शनिवार को गृहमंत्री अमित शाह भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए. उन्हें मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है. इस सब के बीच भूमि पूजन से पहले भारतीय जनता पार्टी के दर्जनों दिग्गज नेताओं के कोरोना पॉजिटिव होने हो जाने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इसे अयोध्या में पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन के मुहूर्त से जोड़ दिया है.

कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सोमवार को एक के बाद एक कई ट्वीट करके भाजपा पर सनातन हिंदू धर्म की मान्यताओं को नज़रअंदाज करने का आरोप लगाया है. दिग्विजय सिंह ने बीजेपी नेताओ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछते हुए राम मंदिर शिलान्यास के मुहूर्त को अशुभ बताया है और इसे टालने की मांग की है.

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट में लिखा कि ‘सनातन हिंदू धर्म की मान्यताओं को नज़रअंदाज करने का नतीजा’-
१- राम मंदिर के समस्त पुजारी कोरोना पोजिटिव
२- उत्तर प्रदेश की मंत्री कमला रानी वरुण का कोरोना से स्वर्गवास
३- उत्तर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष कोरोना पोजिटिव अस्पताल में.
४- भारत के गृह मंत्री अमित शाह कोरोना पोजिटिव अस्पताल में.
५- मध्यप्रदेश के भाजपा के मुख्यमंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कोरोना पोजिटिव अस्पताल में
६- कर्नाटक के भाजपा के मुख्यमंत्री कोरोना पोजिटिव अस्पताल में.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि मोदी जी आप अशुभ मुहुर्त में भगवान राम मंदिर का शिलान्यास कर और कितने लोगों को अस्पताल भिजवाना चाहते हैं? योगी जी आप ही मोदी जी को समझाइए. आपके रहते हुए सनातन धर्म की सारी मर्यादाओं को क्यो तोड़ा जा रहा है? और आपकी क्या मजबूरी है जो आप यह सब होने दे रहे हैं?

दिग्विजय सिंह ने एक दुसरे ट्वीट में कहा, ‘इन हालातों में क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री को कोरोनटाइन नहीं होना चाहिए? क्या कोरोनटाइन में जाने की बाध्यता केवल आम जनता के लिए है? प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री के लिए नहीं है? कोरोनटाइन की समय सीमा १४ दिवस की है.’

कांग्रेस नेता ने कहा कि भगवान राम करोड़ों हिंदुओं के आस्था के केंद्र हैं और हज़ारों वर्षों की हमारे धर्म की स्थापित मान्यताओं के साथ खिलवाड़ मत करिए. राज्यसभा सांसद सिंह ने कहा, ‘५ अगस्त को भगवान राम के मंदिर शिलान्यास के अशुभ मुहुर्त के बारे में विस्तार से जगदगुरू स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने सचेत किया था. मोदी जी की सुविधा पर यह अशुभ मुहुर्त निकाला गया. यानि मोदी जी हिंदू धर्म की हजारो वर्षों की स्थापित मान्यताओं से बड़े हैं! क्या यही हिंदुत्व है?’

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मायावती के सियासी दाँव-पेचों ने बढ़ाई गहलोत की परेशानी, राजस्थान सीएम ने बीजेपी पर लगाया आरोप

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राजस्थान की अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार कांग्रेस के भीतर की अदावत के बाद अब बाहर से आए विधायकों से भी मुसीबत में पड़ गई हैं। इससे पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin pilot) की सरकार गिराने की कथित साजिश और अब बसपा विधायकों के विलय पर बसपा सुप्रीमो मायावती (mayawati) के कानूनी दाँव-पेंचो ने सीएम गहलोत की टेंशन बढा दी है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने सियासी संकट (Rajasthan crisis) के बीच माया की एंट्री पर कहा कि, “मायावती जो बयानबाजी कर रही हैं वो बीजेपी के इशारे पर कर रही हैं। बीजेपी जिस प्रकार से सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग का दुरुपयोग कर रही है, डरा रही है, धमका रही है। आप देखो राजस्थान में ही क्यों हो रहा है।” गहलोत ने कहा, “मायावती भी डर रही हैं उससे, मजबूरी में वो बयान दे रही हैं।”

यही कारण है कि एक दिन पहले मायावती पर भड़ास निकालते हुए सीएम गहलोत ने यहां तक कह दिया कि बसपा प्रमुख मायावती बीजेपी के इशारों पर बयानबाजी कर रही हैं। बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय से अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार को पिछले साल मजबूती मिली थी। तब उनके पास 101 विधायक थे, 6 और मिलने से 107 हो गए। लेकिन 200 सदस्यीय सदन में सत्तारूढ़ दल के पास फिलहाल संख्या बल कम है। सचिन पायलट गुट की बगावत के बाद विधानसभा में बहुमत का गणित बदल गया है। ऐसे में अगर बसपा के विधायकों का साथ छूटता है तो गहलोत सरकार संकट में आ सकती है।

यह भी पढ़े :- Rajasthan Crisis: विधायकों से बोलें CM गहलोत- “अगर जरूरत पड़ी तो राष्ट्रपति भवन तक जाएंगे”

यदि बसपा और बीजेपी विधायकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से फैसला विलय के खिलाफ आता है तो सरकार खतरे में आ सकती है। वहीं 200 विधायकों वाली विधानसभा में से 6 विधायकों को हटाए जाने पर कुल 194 विधायक जरूरी होंगे। जबकि गहलोत सरकार के 102 विधायकों का दावा सही माने तो वो घटकर 96 ही रह जायेगा। जोकि गहलोत सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

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