New Labour Law 2025: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। अक्सर देखा जाता है कि जब कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है (Resignation) या उसे कंपनी से निकाला जाता है (Termination), तो उसका हिसाब-किताब यानी ‘फुल एंड फाइनल सेटलमेंट’ (Full and Final Settlement – FnF) होने में महीनों लग जाते हैं। कर्मचारी HR के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन अब यह सब बदलने वाला है।
केंद्र सरकार के नए लेबर कोड (New Labour Codes), विशेषकर ‘वेतन संहिता’ (Code on Wages) के लागू होने के साथ ही कंपनियों की मनमानी पर लगाम लग जाएगी। नए नियमों के मुताबिक, कंपनी को कर्मचारी के जाने के मात्र 2 दिन (48 घंटे) के भीतर उसका पूरा पैसा चुकाना होगा।
क्या है नया नियम? (The New Rule: 2 Days Settlement)
अब तक कंपनियों में यह चलन था कि कर्मचारी के इस्तीफे के बाद उसका सेटलमेंट 45 से 90 दिनों के बाद किया जाता था। लेकिन नए लेबर कोड के प्रावधान स्पष्ट कहते हैं:
“यदि कोई कर्मचारी नौकरी से इस्तीफा देता है, उसे बर्खास्त किया जाता है, या छंटनी की जाती है, तो कंपनी को उसके अंतिम कार्य दिवस (Last Working Day) के दो दिनों के भीतर उसकी सारी बकाया राशि (Salary + dues) का भुगतान करना होगा।”
कर्मचारियों को कैसे होगा फायदा?
- आर्थिक सुरक्षा: नौकरी छूटने के तुरंत बाद पैसा हाथ में होने से कर्मचारी को नई नौकरी खोजने तक आर्थिक तंगी नहीं झेलनी पड़ेगी।
- चक्कर लगाने से मुक्ति: अक्सर कंपनियां पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस रोकने के बहाने बनाती थीं, अब उन्हें सब कुछ 48 घंटे में क्लियर करना होगा।
- विवादों में कमी: समय पर भुगतान होने से लेबर कोर्ट में जाने वाले मामलों में कमी आएगी।
कंपनियों की बढ़ेंगी मुश्किलें (Impact on Companies)
कंपनियों के लिए यह नियम एक बड़ी चुनौती है। पहले वे ‘नो ड्यूज’ (No Dues) क्लियर करने और एसेट्स रिकवरी में लंबा समय लेती थीं। अब एचआर (HR) और पेरोल (Payroll) डिपार्टमेंट को अपनी प्रक्रिया बहुत तेज करनी होगी, ताकि 2 दिनों के अंदर सारा हिसाब किया जा सके।
काम के घंटे और सैलरी स्ट्रक्चर भी बदलेंगे
सिर्फ सेटलमेंट ही नहीं, नए लेबर लॉ में और भी कई बड़े बदलाव हैं:
- काम के घंटे: कंपनियां अब हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी (4 Days Work Week) का विकल्प दे सकती हैं, लेकिन प्रतिदिन काम के घंटे 12 तक हो सकते हैं।
- इन-हैंड सैलरी: कर्मचारियों की बेसिक सैलरी (Basic Salary) को बढ़ाकर कुल सीटीसी (CTC) का 50% करना होगा। इससे पीएफ (PF) कटेगा ज्यादा, जिससे इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है, लेकिन रिटायरमेंट फंड मोटा बनेगा।
कब से लागू होंगे नियम?
हालांकि, इन कोड्स को संसद से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इन्हें पूरे देश में लागू करने के लिए राज्यों की सहमति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उम्मीद की जा रही है कि 2025 में ये नियम पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे।
